जिंदगी की परछाइयों को पकड़ने की कोशिश वक्त को बुलाया वो ना आया वापिस। रिश्तों ने हमे आजमाया रिश्तों की सभा में कौन अपना कौन पराया | जब जानने की कोशिश की तो समझ ही नहीं आया सबको हमने समझाया । पर कोई हमको पढ़ ही नहीं पाया एक तिनका मांगा सुकून का , पर बदले मे बातों की कचहरी मिली।
आंखो मे दर्द है पर देखने वाला कोई नहीं । जिसको भी शिकायत करें उसके पास नसीहतों की कमी नहीं |
नहीं चाहिए राहगीर यह नसीहतों का गुलदस्ता l जिंदगी को फिर से हसा सके करने दो कोई ऐसी खता !!
It’s too good…
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Thanku 😊
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